Friday, 27 May 2016

Mukesh Pandey: शायरी

Mukesh Pandey: शायरी: कुछ लोग गड़े मुर्दों की खुदाई करते हैं, संबंधों में जहर की बुवाई करते हैं, नफरत है मुझे उन स्वार्थी लोगों से, जो सामने चापलूसी और  प...

Thursday, 19 May 2016

Mukesh Pandey: गीत : हुस्न का रंग हम पर बरसने भी दो

Mukesh Pandey: गीत : हुस्न का रंग हम पर बरसने भी दो: हुस्न का रंग हम पर बरसने भी दो, फूल खिलने से पहले बिखर जाए ना । प्यार के बादलों को बरसने भी दो, ये मोहब्बत का मौसम गुजर जाए ना ।  ...

गीत : हुस्न का रंग हम पर बरसने भी दो

हुस्न का रंग हम पर बरसने भी दो,

फूल खिलने से पहले बिखर जाए ना ।

प्यार के बादलों को बरसने भी दो,

ये मोहब्बत का मौसम गुजर जाए ना ।

                     हुस्न का रंग................

वो क्या मौसम थे अपने मिलन के सनम,

हम बुलाते जिधर तुम आ जाते उधर ।

अब वो मौसम नही वो मिलन भी नही ,

हम अकेले इधर तुम अकेले उधर ।

है खुदा से गुजारिश यही अब सनम,

हम मिलें रात को और सहर आए ना ।

                     हुस्न का रंग................

जब भी याद आई हमको तुम्हारी हँसी ,

हम भी हँसते रहे और हँसाते रहे ।

जब भी याद आए आँसू तुम्हारे हमें,

हम भी चुपके से आँसू बहाते रहे ।

कट सके जो सफर बिन तुम्हारे सनम,

मेरे जीवन में ऐसा सफर आए ना

                     हुस्न का रंग................

तुम को दिल के सिवा क्या करूँ मैं अता,

प्रेम ही मेरी पूँजी तुम्हे है पता ।

तुमको देखूँ तो पलके झपकती नही ,

दिल को कैसे सँभालें हमे दो बता ।

अब जुदाई के बारे में सोचो न तुम ,

यूँ ही हँसते हुए आँख भर आए ना । 

                     हुस्न का रंग................

                            By : मुकेश पाण्डेय

 

 

 

Thursday, 12 May 2016

Mukesh Pandey: "मेरी आदत ही नही "

Mukesh Pandey: "मेरी आदत ही नही ": शराफत से मिलो तो कमजोर समझते हैं लोग , किसी को सताने की ,मेरी आदत ही नही। नजरें मिलाके देखो तो, भड़कते हैं लोग, तिरछी निगाहें डाल...

Tuesday, 10 May 2016

Mukesh Pandey: "मेरी आदत ही नही "

Mukesh Pandey: "मेरी आदत ही नही ": शराफत से मिलो तो कमजोर समझते हैं लोग , किसी को सताने की ,मेरी आदत ही नही। नजरें मिलाके देखो तो, भड़कते हैं लोग, तिरछी निगाहें डाल...

"मेरी आदत ही नही "

शराफत से मिलो तो कमजोर समझते हैं लोग ,
किसी को सताने की ,मेरी आदत ही नही।


नजरें मिलाके देखो तो, भड़कते हैं लोग,
तिरछी निगाहें डालने की, मेरी आदत ही नही।


सच्चाई से जंग लड़ो तो दगा करते हैं लोग,
पीछे से वार करने की, मेरी आदत ही नही।


धर्म की सच्चाई को समझते नही लोग,
झूठी अंधश्रध्दा की, मेरी आदत ही नही।


ज्ञान की बाते करो तो टालते हैं लोग,
व्यर्थ की बातें करने की, मेरी आदत ही नही।


मेरे हर एक काम में विघ्न डालते हैं लोग,
मुश्किलों से भागने की, मेरी आदत ही नही।


गद्दारों और मक्कारों को सलाम करते हैं लोग,
नमक हरामी करने की, मेरी आदत ही नही।

By: MUKESH PANDEY